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Friday, June 7, 2019

Social science chapter-6

6.काम आराम और जीवन

शहर की विशेषताएँ

शहर उस स्थान को कहते हैं जहाँ प्रमुख आर्थिक क्रियाओं में कृषि का कोई स्थान नहीं होता है। जब भोजन का उत्पादन इतना अधिक होने लगा कि उससे अन्य आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने लगा तो शहरों का विकास हुआ। शहर हमेशा से कई गतिविधियों का केंद्र हुआ करते हैं; जैसे राजनीतिक सत्ता, प्रशासनिक तंत्र, उद्योग धंधे, धार्मिक संस्थाएँ और बौद्धिक गतिविधियाँ।

औद्योगीकरण और इंग्लैंड के आधुनिक शहरों का उदय

औद्योगिक क्रांति के कई दशक बाद भी अधिकांश पश्चिमी देश ग्रामीण परिवेश वाले ही थे। ब्रिटेन में शुरु के औद्योगिक शहरों में रहने वाले अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन करके आये थे।

1750 आते आते इंग्लैंड और वेल्स के हर नौ में से एक व्यक्ति लंदन में रहता था। लंदन एक बड़ा शहर था जहाँ की जनसंख्या 675,000 थी। 1810 से 1880 के बीच लंदन की 10 लाख से बढ़कर 40 लाख हो गई; मतलब चार गुनी हो गई।
लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी नहीं थी। इसके बावजूद लंदन पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा लोगों को कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में भी काम मिलता था।
प्रथम विश्व युद्ध (1914 – 1919) के दौरान लंदन में कार और इलेक्ट्रिकल उत्पादों का बनना शुरु हुआ। इससे लंदन में बड़े कारखानों की शुरुआत हुई। कुछ समय बीतने के बाद, लंदन में रोजगार के कुल अवसरों का एक तिहाई इन बड़े कारखानों में मौजूद था।

हाशिये पर के लोग

लंदन शहर के आकार में बढ़ोतरी के साथ यहाँ अपराध में भी बढ़ोतरी हुई। एक अनुमान के अनुसार 1870 के दशक में इस शहर में लगभग 20,000 अपराधी रहते थे। जिन लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता था उनमें से कई छोटे मोटे अपराध करने लगते थे। कई बार यह भी होता था कि किसी कारखाने में कम वेतन पर काम करने की बजाय अपराध करके बेहतर कमाई हो जाती थी।
युद्ध के दौरान कई महिलाओं की नौकरी चली गई। ऐसी महिलाओं को अपना गुजर बसर करने के लिये दूसरों के घरों में चौका बरतन करने को मजबूर होना पड़ा। कई महिलाओं ने दूसरे कामों के लिये अपना घर किराये पर देना शुरु किया।
कई गरीब बच्चों को उनके माँ बाप द्वारा कम पगार वाले कामों पर लगा दिया गया। उसके बाद 1870 में कम्पल्सरी एजुकेशन एक्ट पास हुआ और 1902 में फैक्टरी एक्ट पास हुआ। इन कानूनों की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि छोटे बच्चों को कारखानों में काम न करना पड़े।

आवास की समस्या

गाँवों से आने वाले आप्रवासियों के कारण शहर में आवास की समस्या उत्पन्न हो गई। इन लोगों को फैक्टरी या वर्कशॉप की तरफ से आवास की सुविधा नहीं मिलती थी। चार्ल्स बूथ (लिवरपूल के जहाज मालिक) ने 1887 में एक सर्वे किया। इस सर्वे के मुताबिक लंदन में 10 लाख लोग गरीब थे। यह उस समय के लंदन की आबादी का बीस प्रतिशत था। अमीरों और मध्यम वर्ग के लोगों की औसत जीवन अवधि 55 वर्ष थी। गरीबों की औसत जीवन अवधि 29 वर्ष थी। चार्ल्स बूथ ने निष्कर्ष निकाला कि गरीबों के रहने के लिये लंदन में कम से कम चार लाख कमरों की आवश्यकता थी।
गरीब लोग एक कमरे के मकानों में रहते थे। ऐसे मकानों की अधिक संख्या को जनता के स्वास्थ्य के लिये खतरा माना जाने लगा। ऐसे मकानों हवा आने जाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। ऐसे मकानों में सफाई का प्रावधान भी नहीं था। इन मकानों में हमेशा आग लगने का खतरा भी बना रहता था। कठिन परिस्थिति में रहने वाले लोग समाज में लड़ाई झगड़े के लिये अनुकूल परिस्थिति प्रदान करते थे। लंदन के गरीबों की स्थिति सुधारने के लिये मजदूरों के लिये आवास योजना बनाई गई।

काम आराम और जीवन

लंदन की सफाई

लंदन शहर को साफ सुथरा रखने के लिये कई कदम उठाए गये। मुहल्लों को खुला खुला बनाया गया, खुली जगहों पर हरियाली का प्रबंध किया गया, प्रदूषण घटाया गया और शहर को सुंदर बनाया गया। बड़े बड़े अपार्टमेंट बनाये गये। प्रथम विश्व युद्ध के समय रेंट कंट्रोल कानून लाया गया ताकि लोगों पर किराये का बोझ घटाया जा सके।
दोनों विश्व युद्ध के बीच में जो समय मिला उसमें ब्रिटिश सरकार ने श्रमिकों के लिये आवास मुहैया करने की जिम्मेदारी ली। स्थानीय निकायों ने लगभग दस लाख मकान बनाये। इनमें से ज्यादातर मकान एक परिवार के रहने लायक थे।

शहर में यातायात

शहर में यातायात की सुविधा विकसित की गई। यह वह दौर था जब लंदन का अंडरग्राउंड रेल बन रहा था। पैडिंगटन और फैरिंगटन के बीच अंडरग्राउंड रेल का पहला सेक्शन बना जो 1863 में चालू हो गया। इस रेल सेवा को 1880 तक इतना बढ़ा दिया गया कि इससे साल भर में चार करोड़ यात्री सफर कर सकें।
शुरु में अंडरग्राउंड रेल के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया कुछ अच्छी नहीं थी। कई लोगों के मकान अंडरग्राउंड रेल निर्माण के लिये गिरा दिये गये थे। ऐसे लोग इस रेल का विरोध करते थे। कई लोगों को अंडरग्राउंड रेल के अंदर धुंए से भरी गाड़ी में सफर करना रास नहीं आ रहा था। लेकिन समय बीतने के साथ अंडरग्राउंड रेल सफलता का प्रतीक बन गया।

शहर में सामाजिक बदलाव

औद्योगीकरण के कारण शहर में सामाजिक बदलाव भी हुए। परिवार का आकार छोटा होता जा रहा था और व्यक्तिवाद बढ़ता जा रहा था। कामगार वर्ग में शादियाँ टूटने भी लगीं थीं। उच्च मध्य वर्ग की महिलाओं का अकेलापन बढ़ने लगा था। कई समाज सुधारकों का मानना था कि परिवार को बचाने के लिये महिलाओं को वापस घरों की चारदीवारी में भेजना चाहिए।
इस दौरान होने वाले राजनैतिक आंदोलनों में मुख्य रूप से पुरुष ही शिरकत करते थे। ऐसे आंदोलनों में महिलाओं की भागीदारी होने में समय लगा।
परिवार अब नये बाजार का केंद्र बन गया था।

मनोरंजन और उपभोग

ब्रिटेन के अमीर लोगों में ‘लंदन सीजन’ मनाने की एक परंपरा थी। इस सीजन में अमीरों के लिये कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था।
श्रमिक वर्ग के लोग पब में मिलते थे। उनके लिये एक दूसरे की खबर जानने और विचारों का आदान प्रदान करने के लिये पब एक अच्छी जगह थी। उन्नीसवीं सदी में लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम बनाये गये ताकि लोग ब्रिटेन के इतिहास और उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर सकें। म्यूजिक हॉल निम्न वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय थे। बीसवीं सदी की शुरुआत से ही सिनेमा हर वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय हो चुका था।
श्रमिक वर्ग में बीच पर छुट्टियाँ मनाने का प्रचलन बढ़ गया था।

शहर की राजनीति

राजनैतिक नजरिये से देखें तो एक शहर की विशाल आबादी से खतरा भी था और इसमें अवसर भी थे। यह वह दौर था जब शहर में बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन हुए थे। इनमें से कुछ को तो पुलिस ने बर्बरता से कुचल दिया था। फिर प्रशासन ने इस दिशा में काम किया कि लोगों में से टकराव और विद्रोह की भावना समाप्त हो सके। इसके लिये शहर को सुंदर बनाने के प्रयास किये गये।

औपनिवेशिक भारत के शहर

पश्चिमी यूरोप की तुलना में भारत की स्थिति कुछ अलग थी। अंग्रेजी राज के समय भारत में शहरीकरण की गति धीमी थी। बीसवीं सदी की शुरुआत में भारत की आबादी का 11% से भी कम हिस्सा शहरों में रहता था। अधिकांश शहरी लोग बम्बई, मद्रास और कलकत्ता जैसे तीन प्रेसिडेंसी शहरों में रहते थे।
प्रेसिडेंसी शहर बहुउद्देशीय शहर हुआ करते थे। इन शहरों में मुख्य बंदरगाह, गोदाम, दफ्तर, सैनिक छावनी, शिक्षण संस्थान, म्यूजियम और लाइब्रेरी हुआ करते थे। ये शहर व्यवसाय और राजनीति के केंद्र थे। इसलिये इन शहरों की जनसंख्या में वृद्धि हुई थी।
उन्नीसवीं सदी के अंत के बाद से बम्बई की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई थी। बम्बई की जनसंख्या 1872 में 644,000 से बढ़कर 1941 में 1,500,00 हो गई।

बम्बई: भारत का मुख्य शहर

सत्रहवीं सदी में बम्बई पुर्तगाल के अधीन था। यह सात द्वीपों का एक समूह था। 1661 में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय की शादी पुर्तगाल की राजकुमारी के साथ हुई और बम्बई शहर को उपहार स्वरूप चार्ल्स द्वितीय को दे दिया गया। इस तरह से बम्बई का नियंत्रण ब्रिटिश हुकूमत के हाथों में आ गया। उसके बाद ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अपना कामकाज सूरत से बम्बई शिफ्ट कर दिया।
शुरु में गुजरात के सूती वस्त्रों के लिए बम्बई निर्यात का मुख्य केंद्र था। बाद में उन्नीसवीं सदी में कच्चे माल की भारी मात्रा बम्बई से होकर बाहर भेजी जाने लगी।
धीरे धीरे बम्बई एक महत्वपूर्ण प्राशासनिक केंद्र बन गया। उन्नीसवीं सदी के अंत तक बम्बई एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन चुका था।

शहर में रोजगार

एंगलो मराठा युद्ध में मराठों की हार के बाद 1819 में बम्बई प्रेसिडेंसी की राजधानी बनी बम्बई। कपास और अफीम के व्यापार में वृद्धि के बाद व्यापारियों, बैंकर, कारीगर और दुकानदारों का एक बड़ा समुदाय बम्बई में आकर बस गया। कपड़ा मिलों के खुलने के बाद इस शहर की तरफ लोगों का पलायन और भी बढ़ गया।
बम्बई में पहला सूती कपड़ा मिल 1854 में शुरु हुआ। 1921 तक यहाँ सूती कपड़े की 85 मिलें थीं। इन कारखानों में लगभग 146,000 मजदूर काम करते थे। 1881 से 1931 के बीच इस शहर में रहने वाले लोगों के एक चौथाई हिस्से का ही जन्म यहाँ हुआ था और बाकी के तीन चौथाई आप्रवासी थे।
1919 से 1926 के बीच की अवधि में मिल में काम करने वाले मजदूरों में से 23% महिलाएँ थीं। उसके बाद उनकी संख्या घटते घटते 10% ही रह गई।
रेल की शुरुआत ने इस शहर की ओर आप्रवास को और बढ़ावा दिया। 1888 – 89 में कच्छ में अकाल पड़ने के कारण लोग भारी संख्या में बम्बई की ओर पलायन कर गये। 1898 में जिले के अधिकारी प्लेग की आशंका से इतना डर गये कि उन्होंने लगभग 30,000 लोगों को 1901 तक उनके घर वापस भेज दिया।

आवास और पड़ोस

लंदन की तुलना में बम्बई में अधिक भीड़भाड़ थी। 1840 के दशक के आखिर में लंदन के प्रत्येक व्यक्ति के लिए 155 वर्ग गज जगह उपलब्ध थी। लेकिन बम्बई के प्रत्येक व्यक्ति के लिये केवल 9.5 वर्ग गज जगह उपलब्ध थी। लंदन में प्रति घर रहने वालों की संख्या 8 थी जबकि बम्बई के लिये यह संख्या 20 व्यक्ति प्रति घर थी। लंदन की तुलना में बंबई का जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक था।
1800 के दशक के शुरु में बॉम्बे फोर्ट को इस शहर का दिल माना जाता था। इस शहर के एक हिस्से में ‘नेटिव’ लोग रहते थे और दूसरे हिस्से में ‘गोरे’ लोग रहते थे। तीनों प्रेसिडेंसी शहरों में नस्ल के आधार पर इसी तरह का विभाजन देखने को मिलता था। ‘गोरे’ लोगों के रिहायशी इलाके यहाँ के ‘नेटिव’ लोगों के रिहायशी इलाकों से बिलकुल अलग होते थे।
शहर का विकास सुनियोजित ढ़ंग से नहीं हुआ था। इसलिए 1850 के मध्य तक यहाँ पानी और मकान की भारी किल्लत बन चुकी थी।
अमीर लोग बड़े बड़े बंगलों में रहते थे। लेकिन मजदूरों का 70% से अधिक हिस्सा बम्बई की चालों में रहता था। इन चालों में सघन आबादी रहा करती थी। मिल में काम करने वाले मजदूरों का 90% हिस्सा गिरनगाँव में रहता था। गिरनगाँव इन मिलों से मुश्किल से 15 मिनट के फासले पर पड़ता था।

एक चाल एक बहुमंजिला इमारत होती थी। इस तरह के मकान निजी मालिकों की संपत्ति हुआ करते थे। हर चाल में एक कमरे के कई मकान होते थे। इनमें कोई प्राइवेट टॉयलेट नहीं होता था और कई लोगों को एक ही टॉयलेट से काम चलाना पड़ता था। किराया इतना अधिक होता था कि लोगों को किसी रिश्तेदार या स्वजातीय लोगों के साथ एक कमरा शेअर करना पड़ता था।
इस तरह के मकान बहुत छोटे होते थे इसलिए ज्यादातर गतिविधियों के लिए लोग गलियों और आस पड़ोस का इस्तेमाल करते थे। उदाहरण के लिए कपड़े धोने और यहाँ तक की सोने का काम भी लोग खुले में करते थे। खाली जमीन पर शराब की दुकानें और अखाड़ा खुल गये थे। इन खाली जगहों का इस्तेमाल करतब दिखाने वाले और फेरीवाले भी किया करते थे।
नीची जाति के लोगों के लिये मकान मिलना मुश्किल साबित होता था। कई चालों में ऐसे लोगों का प्रवेश वर्जित था। ऐसे लोगों को अक्सर टिन, सुखे पत्ते और बाँस की बनी झोपड़ियों में रहना पड़ता था।
1898 में सिटी ऑफ बॉम्बे इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की स्थापना हुई। इसका मुख्य उद्देश्य था शहर के बीचोबीच बसे मकानों को हटाना। 1918 में लगभग 64,000 लोगों को विस्थापित किया गया लेकिन उनमें से केवल 14,000 लोगों को पुनर्वासित किया गया। 1918 में एक रेंट एक्ट पारित किया गया ताकि किराये को नियंत्रण में रखा जा सके। लेकिन इससे मकानों की किल्लत और बढ़ गई क्योंकि मकान मालिकों ने किराये पर मकान देना ही बंद कर दिया।

बम्बई में भूमि विकास

बम्बई का निर्माण मुख्य रूप से ऐसी जमीन पर हुआ था जिसे समंदर से निकाला गया था। सबसे पहला रीक्लेमेशन प्रोजेक्ट 1784 में शुरु हुआ था। बम्बई के गवर्नर विलियम हॉर्नबी ने एक विशाल तटीय दीवार बनाने की अनुमति दी ताकि निचले इलाकों में जल जमाव को रोका जा सके।
इस तरह से समय समय पर कई रीक्लेमेशन प्रोजेक्ट पर काम हुआ। 1870 तक यह शहर लगभग 22 वर्ग मील में फैल चुका था। यहाँ तक की मशहूर मेरीन ड्राइव का निर्माण भी रीक्लेमेशन वाली जमीन पर हुआ था। आधुनिक नवी मुम्बई भी इसी तरह की जमीन पर बसी हुई है।

सपनों का शहर: सिनेमा और संस्कृति

पहली हिंदी फिल्म; राजा हरिश्चंद्र का निर्माण 1913 में दादासाहेब फाल्के ने किया था। 1925 तक बम्बई भारत की फिल्मी राजधानी बन चुका था। 1947 में बम्बई में 50 फिल्में बनीं थीं जिनमें लगभग 756 मिलियन रुपये लगे थे।
फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर लोग विभिन्न इलाकों से आये आप्रवासी थे। इस तरह से उन्होंने इस इंडस्ट्री के राष्ट्रीय स्वरूप बनाने में अहम योगदान दिया था।

शहर: पर्यावरण की चुनौतियाँ

शहरों के विकास के कारण पर्यावरण पर बुरे असर पड़े जो दूरगामी थे। इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में घरों और कारखानों में कोयले का इस्तेमाल होता था जिससे गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हुईं। ज्यादातर शहरों में चिमनियों से निकलने वाले धुँए की वजह से आसमान हमेशा सलेटी रंग का दिखता था। कई लोगों को चिड़चिड़ेपन, सांस की परेशानी और मैले कपड़े की समस्या हुई। 1840 आते आते डर्बी, लीड्स और मैनचेस्टर जैसे शहरों ने शहर में धुँए पर नियंत्रण के लिए कानून बनाये। लेकिन इस कानून को लागू करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि उद्योगपति नई और स्वच्छ टेक्नॉलोजी में निवेश नहीं करना चाहते थे।
भारत के प्रेसिडेंसी शहरों में भी ऐसी ही समस्याएँ देखने को मिलती थीं। घरों, रेलवे और उद्योग में कोयला मुख्य ईंधन था। कोयले के जलने से पूरे शहर में काला धुँआ और काली राख छाई रहती थी। वायु प्रदूषण रोकने के लिए कई कानून बनाये गये लेकिन उनसे कोई ठोस परिणाम नहीं निकले।

NCERT Solution

प्रश्न:1 अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी क्यों फैलने लगी? कारण बताइए।
उत्तर: लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी न होने के बावजूद यह शहर पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में काफी लोगों को काम मिलता था। इसलिए अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी बढ़ने लगी।
प्रश्न:2 उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के बीच लंदन में औरतों के लिए उपलब्ध कामों में किस तरह के बदलाव आए? ये बदलाव किन कारणों से आए?
उत्तर: युद्ध के दौरान अधिकतर पुरुष युद्ध लड़ने चले गये। इसलिए महिलाओं को कारखानों में काम मिलने लगा। जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, महिलाओं की नौकरियाँ जाने लगीं। अब अधिकाँश महिलाओं को घरों में काम करना पड़ा। इनमें से कई महिलाओं ने कपड़े सिलने, कपड़े धोने और माचिस बनाने का काम भी शुरु कर दिया।
प्रश्न:3 विशाल शहरी आबादी के होने से निम्नलिखित पर क्या असर पड़ता है? ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ समझाइए।
प्रश्न:a) जमींदार
उत्तर: एक जमींदार मकान को किराये पर लगा कर अपनी आय बढ़ा सकता है। उन्नीसवीं सदी के आखिर और बीसवीं सदी की शुरुआत में लंदन में ऐसी ही स्थिति थी। बीसवीं सदी के शुरु में बम्बई में भी यही हुआ था।
प्रश्न:b) कानून व्यवस्था सँभालने वाला पुलिस अधीक्षक
उत्तर: शहर में जब आबादी बढ़ जाती है तो समाज में कई विसंगतियाँ आती हैं। जिन लोगों को सही रोजगार नहीं मिल पाता है वे छोटे मोटे अपराध करना शुरु कर देते हैं। आवास की किल्लत के कारण भी लोगों में रोष जमा होने लगता है। इससे अपराध में वृद्धि होती है। किसी पुलिस अधीक्षक के लिए यह एक चुनौतीभरा अवसर होता है क्योंकि उसे अपराध को नियंत्रण में रखना होता है।
प्रश्न:c) राजनीतिक दल का नेता
उत्तर: किसी राजनीतिक दल के नेता के लिए एक बड़ी आबादी से चुनौती भी मिलती है और उसके लिए अवसर भी होते हैं। एक बड़ी आबादी में रोष की भावना को रोकना एक चुनौती होती है। लेकिन यदि कोई नेता इसका सही हल निकाल लेता है तो फिर उसके लिए अपार जन समर्थन तैयार हो जाता है।

प्रश्न:4 निम्नलिखित की व्याख्या करें:
प्रश्न:a) उन्नीसवीं सदी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन क्यों किया?
उत्तर: एक कमरे के मकानों में व्याप्त गंदगी से महामारी फैलने का खतरा रहता था। ऐसे घरों में आग का खतरा भी बना रहता था। अपराध के बढ़ने की भी आशंका रहती थी। इन सब दुष्परिणामों को रोकने के लिए धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन किया।
प्रश्न:b) बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वाली जिंदगी पर आधारित क्यों होती थीं?
उत्तर: बम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर लोग बाहर से पलायन करके आये थे। इसलिए वे उन आप्रवासियों की समस्या को बेहतर ढ़ंग से समझते थे। इसलिए बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वाली जिंदगी पर आधारित होती थीं।
प्रश्न:c) उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि क्यों हुई?
उत्तर: उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं:
  • अफीम और कपास के व्यापार में वृद्धि
  • कपड़ा मिलों का बड़ी संख्या में शुरु होना
  • रेल का विस्तार
प्रश्न:5 लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध करने के लिए इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में मनोरंजन के कौन कौन से साधन सामने आए।
उत्तर: लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध करने के लिए इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में मनोरंजन के निम्नलिखित साधन सामने आए:
लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम

प्रश्न:6 लंदन में आए उन सामाजिक परिवर्तनों की व्याख्या करें जिनके कारण भूमिगत रेलवे की जरूरत पैदा हुई। भूमिगत रेलवे के निर्माण की आलोचना क्यों हुई?
उत्तर: जब शहर का विस्तार होने लगा तो लोग काम की जगह से दूर रहने लगे। शहर से भीड़भाड़ कम करने के लिए भी यह जरूरी था कि आबादी के एक बड़े हिस्से को शहर से दूर भेज दिया जाये। लेकिन इसके लिए यातायात के एक ऐसे साधन की जरूरत थी जिससे लोग कम समय में अपने घर से काम करने की जगह तक पहुँच सकें। इसलिए लंदन में भूमिगत रेलवे की जरूरत महसूस हुई। शुरु शुरु में भूमिगत रेलवे के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया नकारात्मक थी। कई लोग इस बात से दुखी थे कि भूमिगत रेलवे के निर्माण के लिए कई मकानों को गिरा दिया गया था। कई लोगों को धुँए से भरे भूमिगत रेल में सफर करने में परेशानी होती थी।
प्रश्न:7 पेरिस के हॉसमानीकरण का क्या अर्थ है? इस तरह के विकास को आप किस हद तक सही या गलत मानते हैं? इस बात का समर्थन या विरोध करते हुए अखबार के संपादक को पत्र लिखिए और उसमें अपने दृष्टिकोण के पक्ष में कारण दीजिए।
उत्तर: बैरन हॉसमैन एक टाउन प्लानर थे जिन्होंने पेरिस को एक आदर्श शहर बनाने की कोशिश की। इस प्रक्रिया में लोगों को भारी संख्या में विस्थापित किया गया। इसके बाद एक सुंदर शहर तो बनकर तैयार हो गया लेकिन इससे ज्यादातर लोग परेशान हो गये।
कोई भी शहर सिर्फ आलीशान भवनों और यातायात की दक्ष व्यवस्था से ही विकसित नहीं होता है। एक शहर अपने लोगों के कारण भी विकसित होता है। हर शहर नाना प्रकार के लोगों का एक सुंदर मिश्रण होता है जिसमें हर व्यक्ति का अपना योगदान होता है। लोगों से ही शहर की आत्मा बनती है। हॉसमानीकरण के बाद पेरिस में हर सड़क, हर गली और हर भवन एक ही जैसा दिखता था। वह बिलकुल कृत्रिम शहर लगता था। किसी भी मुहल्ले की अपनी अलग पहचान ही नहीं थी।
प्रश्न:8 सरकारी नियमन और नए कानूनों ने प्रदूषण की समस्या को किस हद तक हल किया? निम्नलिखित के स्तर में परिवर्तन के लिए बने कानूनों की सफलता और विफलता का एक एक उदाहरण दीजिए:
प्रश्न:a) सार्वजनिक जीवन
उत्तर: दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सीएनजी के इस्तेमाल पर कोर्ट का आदेश इसका एक अच्छा उदाहरण हो सकता है। जब से दिल्ली में सीएनजी का इस्तेमाल होने लगा है तब से यहाँ की हवा बेहतर हुई है। इससे आम जन जीवन की जिंदगी बेहतर हुई है।
प्रश्न:b) निजी जीवन
उत्तर: निजी जीवन को ठीक करने के लिए सरकार को कानून के साथ साथ नागरिकों को अधिकार और सुविधाएँ भी देनी पड़ती हैं। हम सभी जानते हैं कि कोयले या उपले की तुलना में एलपीजी एक बेहतर ईंधन है। ज्यादातर शहरी इलाकों में सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर किया है। इससे लोगों को भी इस स्वच्छ ईंधन को अपनाने में मदद मिली है। इससे गृहिणियों का जीवन पहले से बेहतर हुआ है। इससे वायु प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिली है।



Extra Questions Answers

प्रश्न:1 शहर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: शहर उस स्थान को कहते हैं जहाँ प्रमुख आर्थिक क्रियाओं में कृषि का कोई स्थान नहीं होता है। जब भोजन का उत्पादन इतना अधिक होने लगा कि उससे अन्य आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने लगा तो शहरों का विकास हुआ।
प्रश्न:2 अठारहवीं सदी में अधिकतर लोग लंदन की तरफ पलायन क्यों करते थे?
उत्तर: लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी नहीं थी। इसके बावजूद लंदन पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा लोगों को कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में भी काम मिलता था। इसलिये अठारहवीं सदी में अधिकतर लोग लंदन की तरफ पलायन करते थे।
प्रश्न:3 छोटे बच्चों को लंदन के कारखानों में काम करने से रोकने के लिये ब्रिटिश सरकार ने क्या कदम उठाये?
उत्तर: 1870 में कम्पल्सरी एजुकेशन एक्ट पास हुआ और 1902 में फैक्टरी एक्ट पास हुआ। इन कानूनों की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि छोटे बच्चों को कारखानों में काम न करना पड़े।

प्रश्न:4 लंदन में गरीब लोग किस तरह के मकान में रहते थे? इससे क्या समस्या थी?
उत्तर: गरीब लोग एक कमरे के मकानों में रहते थे। ऐसे मकानों की अधिक संख्या को जनता के स्वास्थ्य के लिये खतरा माना जाने लगा। ऐसे मकानों हवा आने जाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। ऐसे मकानों में सफाई का प्रावधान भी नहीं था। इन मकानों में हमेशा आग लगने का खतरा भी बना रहता था। कठिन परिस्थिति में रहने वाले लोग समाज में लड़ाई झगड़े के लिये अनुकूल परिस्थिति प्रदान करते थे।
प्रश्न:5 औद्योगीकरण से शहर में किस तरह के सामाजिक बदलाव हुए?
उत्तर: औद्योगीकरण के कारण शहर में सामाजिक बदलाव भी हुए। परिवार का आकार छोटा होता जा रहा था और व्यक्तिवाद बढ़ता जा रहा था। कामगार वर्ग में शादियाँ टूटने भी लगीं थीं। उच्च मध्य वर्ग की महिलाओं का अकेलापन बढ़ने लगा था।
प्रश्न:6 ब्रिटेन में श्रमिक वर्ग के लोग मनोरंजन के लिये क्या करते थे?
उत्तर: श्रमिक वर्ग के लोग पब में मिलते थे। उनके लिये एक दूसरे की खबर जानने और विचारों का आदान प्रदान करने के लिये पब एक अच्छी जगह थी। उन्नीसवीं सदी में लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम बनाये गये ताकि लोग ब्रिटेन के इतिहास और उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर सकें। म्यूजिक हॉल निम्न वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय थे। बीसवीं सदी की शुरुआत से ही सिनेमा हर वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय हो चुका था।

प्रश्न:7 बम्बई कैसे ब्रिटिश हुकूमत के कब्जे में आया?
उत्तर: सत्रहवीं सदी में बम्बई पुर्तगाल के अधीन था। यह सात द्वीपों का एक समूह था। 1661 में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय की शादी पुर्तगाल की राजकुमारी के साथ हुई और बम्बई शहर को उपहार स्वरूप चार्ल्स द्वितीय को दे दिया गया। इस तरह से बम्बई का नियंत्रण ब्रिटिश हुकूमत के हाथों में आ गया।
प्रश्न:8 बम्बई की चाल का वर्णन करें।
उत्तर: एक चाल एक बहुमंजिला इमारत होती थी। इस तरह के मकान निजी मालिकों की संपत्ति हुआ करते थे। हर चाल में एक कमरे के कई मकान होते थे। इनमें कोई प्राइवेट टॉयलेट नहीं होता था और कई लोगों को एक ही टॉयलेट से काम चलाना पड़ता था। किराया इतना अधिक होता था कि लोगों को किसी रिश्तेदार या स्वजातीय लोगों के साथ एक कमरा शेअर करना पड़ता था।
☆END☆

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